नई दिल्ली
देश के विशाल असंगठित कार्यबल को औपचारिक कल्याणकारी दायरे में लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। श्रम व रोजगार मंत्रालय ने असंगठित श्रमिकों के साथ-साथ गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए 'राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' (National Social Security Board) के गठन को अधिसूचित कर दिया है। सामाजिक सुरक्षा संहिता के वैधानिक ढांचे के तहत स्थापित यह बोर्ड देश के डिजिटल गिग और प्लेटफॉर्म पेशेवरों को भारत के औपचारिक कल्याणकारी ढांचे में एकीकृत करने वाला एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। इस बोर्ड का मुख्य उद्देश्य करोड़ों गिग, प्लेटफॉर्म और पारंपरिक असंगठित श्रमिकों के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं तैयार करना, उनकी निगरानी करना और सामाजिक सुरक्षा के अंतर को दूर करना है।
ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष ने की तारीफ
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की अधिसूचना जारी करने पर ऑल इंडिया न्यू पेंशन स्कीम एम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत पटेल ने इसकी तारीफ की है। उन्होंने इसके लिए की तारीफ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का हार्दिक आभार व्यक्त किया।
डॉ. मंजीत पटेल ने एक्स पर लिखा- "भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' के तहत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के साथ-साथ डिजिटल गिग (Gig) और प्लेटफॉर्म (Platform) वर्कर्स के लिए 'राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड' (National Social Security Board) की आधिकारिक अधिसूचना जारी करना एक बेहद ऐतिहासिक, दूरदर्शी और सराहनीय कदम है। ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AINPSEF) इस क्रांतिकारी निर्णय का सहर्ष स्वागत करता है। देश के करोड़ों असंगठित एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़े कर्मयोगियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना भारत के श्रम कल्याण और समावेशी विकास के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। यह बोर्ड न केवल देश के विशाल अनौपचारिक श्रम बल के भविष्य को सुरक्षित करेगा, बल्कि उनके लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाओं और सुरक्षा प्रणालियों को प्रभावी ढंग से लागू करने का मार्ग प्रशस्त करेगा। इस जन-हितैषी निर्णय के लिए हम केंद्र सरकार और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय का हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।"
साल में कम से कम तीन बार होगी बैठक
सरकार के अनुसार, बोर्ड विभिन्न श्रमिक वर्गों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करेंगे और सामाजिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देंगे। इसके अलावा, वे केंद्र द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करेंगे, राज्यों में रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और सामाजिक सुरक्षा कोष से होने वाले व्यय का भी परीक्षण करेंगे।
इन बोर्डों की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी। बैठकों की कार्यप्रणाली और नियम केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित किए जाएंगे।
श्रम मंत्रालय का मानना है कि ये बोर्ड देश में तेजी से बढ़ रहे गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा की कमी को दूर करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वर्तमान समय में ऑनलाइन डिलीवरी, राइड-हेलिंग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों श्रमिक कार्यरत हैं, जिनके लिए सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।
असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलेगा लाभ
सरकार ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता असंगठित, गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा उपायों का वैधानिक ढांचा उपलब्ध कराती है। इसी दिशा में हाल के वर्षों में श्रम कानूनों में व्यापक सुधार भी किए गए हैं।
सितंबर में आयोजित एक चर्चा के दौरान उद्योग जगत, श्रमिक संगठनों, विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने भी कहा था कि नए श्रम कोड नियंत्रण आधारित नियामक व्यवस्था से सहयोग आधारित श्रम व्यवस्था की ओर महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
श्रम मंत्रालय के सचिव चंद्र भूषण कुमार ने उस समय कहा था कि नए श्रम सुधारों के तहत विभिन्न कानूनों को एकीकृत किया गया है, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, रिटर्न फाइलिंग को एकरूप बनाया गया है और वेतन की परिभाषा में भी अधिक समानता लाई गई है। इन कदमों का उद्देश्य श्रमिकों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ व्यवसायों के लिए अनुपालन बोझ कम करना है।
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का गठन असंगठित क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढांचे से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिक किन्हें माना जाता है?
असंगठित क्षेत्र में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ श्रम पद्धतियों में बदलाव आया है। आधिकारिक परिभाषा के अनुसार:
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गिग श्रमिक: ऐसे व्यक्ति जो पारंपरिक नियोक्ता-कर्मचारी संबंध से बाहर स्वतंत्र रूप से काम करते हैं या कार्य व्यवस्था में भाग लेकर कमाई करते हैं, उन्हें गिग श्रमिक कहा जाता है।
प्लेटफॉर्म श्रमिक: जो श्रमिक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से या उनके साथ जुड़कर कार्य में संलग्न होते हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म श्रमिक के रूप में परिभाषित किया गया है।
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की अध्यक्षता कौन करेगा?
इस नवगठित राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की संरचना को व्यापक और समावेशी बनाया गया है।
अध्यक्षता: बोर्ड की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे।
सदस्यता: इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। इसके अलावा प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों, नियोक्ताओं, नागरिक समाज संगठनों (Civil Society Organisations), श्रमिक संघों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर एसोसिएशनों के प्रतिनिधि भी इस बोर्ड में शामिल किए गए हैं।
बैठकें: केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी और यह अपनी बैठकों में व्यापार के संचालन से संबंधित नियमों का पालन करेगा।
बोर्ड की मुख्य जिम्मेदारियां और कार्य क्या होंगे?
राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड को सामाजिक सुरक्षा अंतराल को समाप्त करने के लिए व्यापक शक्तियां और दायित्व सौंपे गए हैं। बोर्ड के प्रमुख कार्यों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
योजनाओं की सिफारिश: बोर्ड असंगठित श्रमिकों, गिग श्रमिकों और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के लिए उपयुक्त कल्याणकारी योजनाएं तैयार करने हेतु केंद्र सरकार को सिफारिशें करेगा।
सलाह और निगरानी: यह सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रशासन से उत्पन्न होने वाले और संदर्भित किए गए मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देगा। साथ ही, यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित सामाजिक कल्याण योजनाओं की निगरानी करेगा।

