By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
Express News TodayExpress News Today
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Search
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
Reading: H-1B वीजा पर जेडी वेंस के बयान से विवाद, गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास से जुड़ा नवी पिल्लई का संघर्ष
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
Express News TodayExpress News Today
Font ResizerAa
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
Search
  • Home
  • देश
  • विदेश
  • राज्य
  • मध्यप्रदेश
    • मध्यप्रदेश जनसंपर्क
  • छत्तीसगढ़
    • छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
  • राजनीती
  • धर्म
  • अन्य खबरें
    • मनोरंजन
    • खेल
    • तकनीकी
    • व्यापार
    • करियर
    • लाइफ स्टाइल
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
देश

H-1B वीजा पर जेडी वेंस के बयान से विवाद, गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास से जुड़ा नवी पिल्लई का संघर्ष

News Desk
Last updated: 2026/10/11 at 9:05 PM
News Desk
Share
10 Min Read
H-1B वीजा पर जेडी वेंस के बयान से विवाद, गिरमिटिया मजदूरों के इतिहास से जुड़ा नवी पिल्लई का संघर्ष
SHARE

नई दिल्ली
इतिहास अक्सर अपने पन्नों में क्रूरता और न्याय, दोनों का हिसाब बहुत सलीके से रखता है। एक तरफ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा धारक उच्च-शिक्षित भारतीय पेशेवरों को अपने घरेलू राजनीतिक स्वार्थ के लिए 'इंडेंचर्ड लेबर' अर्थात विदेशी बंधुआ नौकर करार दिया है। वहीं ठीक उसी समय दुनिया के मंच पर एक ऐतिहासिक घटना घटी। भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को शांति के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया है। नवी पिल्लई की रगों में उसी 'इंडेंचर्ड लेबर' का खून दौड़ रहा है, जिसके दादा-दादी को 1890 के दशक में भारत से गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका ले जाया गया था। यह महज एक संयोग नहीं है; यह इतिहास का सबसे बड़ा काव्यात्मक न्याय है और पश्चिमी अहंकार पर समय का एक करारा तमाचा भी।

जेडी वेंस का 'ऐतिहासिक अज्ञान' और भारत की कड़ी आपत्ति
किसी देश की ताकत का अंदाजा उसके हथियारों, उसकी अर्थव्यवस्था या उसके राष्ट्र प्रमुखों के बयानों से लगाया जा सकता है। लेकिन किसी सभ्यता की असली पहचान इस बात से होती है कि वह दूसरे इंसान को किस नजर से देखती है। उसके लिए इंसान एक नागरिक है, एक सहकर्मी है, एक प्रतिभा है या सिर्फ सस्ता श्रम?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों पर आरोप लगाते हुए एच-1बी वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए ‘फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ जैसी ओछी शब्दावली का इस्तेमाल किया। शब्दों का अपना इतिहास होता है। कुछ शब्द केवल किसी नीति की आलोचना नहीं करते, वे अपने भीतर सदियों का अपमान और पीड़ा भी लेकर चलते हैं।

यह केवल एक भद्दी राजनीतिक बयानबाजी नहीं है; यह उस पश्चिमी अज्ञानता का नग्न प्रदर्शन है जो औपनिवेशिक शोषण की ऐतिहासिक पीड़ा को सिरे से खारिज करता है। यही कारण है कि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे 'बेहद आक्रामक' करार दिया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि यह शब्दावली उन दर्दनाक ऐतिहासिक और औपनिवेशिक विरासतों से जुड़ी है, जिन्हें इस तरह के सस्ते राजनीतिक बयानों में इस्तेमाल करना संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

'असली' गिरमिटिया संघर्ष और नवी पिल्लई की ऐतिहासिक विजय
19वीं सदी में दास प्रथा के उन्मूलन के बाद ब्रिटिश और यूरोपीय साम्राज्यों ने अपनी अर्थव्यवस्था को जिंदा रखने के लिए भारत से लाखों लोगों को धोखे और मजबूरी में मॉरीशस, फिजी, गुयाना और दक्षिण अफ्रीका भेजा था। इन्हें गिरमिटिया कहा जाता है। वे असली बंधुआ मजदूर थे, जिन्हें अमानवीय परिस्थितियों में जहाजों में ठूंसकर ले जाया गया और जीवन भर कोड़ों की मार के साए में रखा गया। नोबेल शांति पुरस्कार 2026 की विजेता नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका में भारतीय तमिल माता-पिता के यहां हुआ था। वह दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त होने वाली पहली अश्वेत महिला बनीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में जज तथा संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के रूप में अपनी ऐतिहासिक सेवाएं दीं।

उनकी यह वैश्विक उपलब्धि उन अनाम भारतीय पूर्वजों के खून-पसीने और संघर्ष की जीत है, जिन्होंने उस घोर औपनिवेशिक अंधकार में भी अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा और न्याय के बीज बोए। आज एक सदी से भी ज्यादा लंबे वक्त बाद, उसी शोषित परिवार की पोती शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के लिए नोबेल जीतती है।

H-1B पेशेवर: 'बंधुआ मजदूर' नहीं, अमेरिकी इकॉनमी की धुरी
वेंस को यह तथ्य स्वीकार करने में शायद राजनीतिक असुविधा होती है कि सिलिकॉन वैली से लेकर वॉल स्ट्रीट तक, अमेरिकी अर्थव्यवस्था का जो पहिया आज दुनिया भर में घूम रहा है, उसकी धुरी यही भारतीय पेशेवर हैं। वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट और अन्य टेक दिग्गजों पर H-1B प्रोग्राम का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिकी कॉरपोरेट जगत इन पेशेवरों पर इसलिए निर्भर नहीं है कि वे "सस्ते मजदूर" हैं, बल्कि इसलिए निर्भर है क्योंकि उनके बिना अमेरिका अपना तकनीकी और नवोन्मेषी वर्चस्व खो देगा।

भारत ने यह साफ कर दिया है कि कुशल कामगारों की इस आवाजाही से दोनों देशों को फायदा होता है, और इससे उत्पादकता, प्रतिस्पर्धा तथा रोजगार सृजन को बल मिलता है। दुनिया के सबसे प्रतिभाशाली सॉफ्टवेयर आर्किटेक्ट्स और डेटा साइंटिस्ट्स की तुलना उन ऐतिहासिक बंधुआ मजदूरों से करना, केवल पश्चिमी राजनेताओं की बौद्धिक दरिद्रता को दर्शाता है।

नए भारत का युग: अपनी कहानी, अपनी जुबानी
महान साहित्यकार वी.एस. नायपॉल खुद एक गिरमिटिया परिवार से थे। उन्होंने अपनी जड़ों और पहचान के संघर्ष को उकेरते हुए लिखा था कि इतिहास हमेशा विजेताओं द्वारा लिखा जाता है, लेकिन सभ्यताएं संघर्ष करने वालों द्वारा बनाई जाती हैं। आज नवी पिल्लई का नोबेल पुरस्कार यह साबित करता है कि भारतीय डायस्पोरा ने न केवल उस औपनिवेशिक त्रासदी की राख से खुद को खड़ा किया है, बल्कि आज वे दुनिया को मानवाधिकार, न्याय और शांति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

जेडी वेंस और उनके जैसे राजनेताओं को इस मुगालते से बाहर आ जाना चाहिए कि आज का भारत उनके द्वारा थोपी गई शब्दावलियों को चुपचाप निगल लेगा। आप अमेरिकी चुनाव रैलियों में तालियां बटोरने के लिए हमारी प्रतिभा का अपमान कर सकते हैं, लेकिन इस अटल सच्चाई को नहीं बदल सकते। जिस 'इंडेंचर्ड लेबर' के इतिहास को आप अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी इतिहास को रौंदकर नवी पिल्लई जैसी शख्सियतें आज नोबेल जीत रही हैं, और आपके तथाकथित 'विदेशी नौकर' आपके देश के भविष्य का कोड लिख रहे हैं। यह नए भारत की बौद्धिक और कूटनीतिक धमक है, जिसे किसी भी संकीर्ण राजनीतिक बयानबाजी के दायरे में नहीं बांधा जा सकता।

गिरमिटिया उन भारतीय मजदूर
जाता है जिन्हें 19वीं और 20वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान एक अनुबंध (एग्रीमेंट) के तहत विदेशों में गन्ने और चाय के बागानों में काम करने के लिए ले जाया गया था। 'गिरमिटिया' (Indentured Labourers) शब्द अंग्रेजी के 'एग्रीमेंट' का अपभ्रंश है। 19वीं और 20वीं शताब्दी में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारत (मुख्यतः उत्तर प्रदेश और बिहार) से लाखों मजदूरों को गन्ने और रबर के खेतों में काम करने के लिए फिजी, मॉरीशस, गुयाना, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे सुदूर देशों में ले जाया गया था। काव्यात्मक न्याय के संदर्भ में गिरमिटिया इतिहास को इस तरह भी देखा जा सकता है:

भाषा और संस्कृति की विजय
भोजपुरी और अवधी का अमर होना: जो मजदूर अपनी मातृभूमि से दूर गए, उनके पास केवल अपनी भाषा और स्मृतियां थीं। आज फिजी और मॉरीशस जैसे देशों में भोजपुरी एक जीवित और सम्मानित भाषा है। गिरमिटिया मजदूरों ने अपनी बोली को एक वैश्विक पहचान दे दी।

तुलसीदास की रामचरितमानस: गिरमिटिया मजदूर अपने साथ 'रामचरितमानस' की प्रतियां लेकर गए थे। जहाजों के अंधेरे कमरों से लेकर गन्ने के खेतों तक, राम का वनवास उनका अपना वनवास बन गया था। आज उन देशों में रामचरितमानस का गान उनकी सांस्कृतिक उत्तरजीविता का सबसे बड़ा प्रतीक है।

सत्ता और शक्ति का हस्तांतरण
शोषक से शासक तक की यात्रा: काव्यात्मक न्याय का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जिन गिरमिटिया मजदूरों को गुलामों की तरह बंधुआ बनाकर ले जाया गया था, आज उन्हीं की संतानें उन देशों की नियति तय कर रही हैं।

मॉरीशस के सर सीवूसागर रामगुलाम और प्रविंद जुगनाथ, फिजी के महेंद्र चौधरी, और गुयाना व सूरीनाम के राष्ट्रप्रमुखों के रूप में गिरमिटिया वंशजों का सत्ता में आना उस ऐतिहासिक अन्याय का सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक न्याय है।

साहित्य में पीड़ा को आवाज
साहित्यकारों (जैसे अभिमन्यु अनत, जिन्हें मॉरीशस का प्रेमचंद कहा जाता है) ने अपने उपन्यासों जैसे 'लाल पसीना' के माध्यम से गिरमिटिया समाज के संघर्ष को अमर कर दिया

इतिहास ने जिन्हें सिर्फ 'मजदूरों की संख्या' माना था, साहित्य ने उन्हें नायक और महानायक का दर्जा दिया। यह साहित्य का काव्यात्मक न्याय है, जिसने इतिहास के पन्नों में दबी उनकी चीखों को सुर और महत्ता दी।

धरती को स्वर्ग बनाना
गिरमिटिया मजदूरों को जिन बंजर द्वीपों और घने जंगलों को साफ करने के लिए भेजा गया था, उन्होंने अपने खून-पसीने से उन देशों को दुनिया के सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थलों और समृद्ध अर्थव्यवस्थाओं में बदल दिया। उनका शोषण करने वाले साम्राज्य का पतन हो गया, लेकिन मजदूरों द्वारा सींची गई धरती आज भी लहलहा रही है।

You Might Also Like

चेन्नई को ₹13 हजार करोड़ की सौगात, PM मोदी ने मेट्रो फेज-2 येलो लाइन का किया उद्घाटन

UN में पाकिस्तान पर भारत का तीखा प्रहार, अनमोल बेदी ने आतंकवाद और परमाणु धमकी पर घेरा

F-35 पर अमेरिका को वायुसेना प्रमुख एपी सिंह का तंज, बोले- विमान के पास भी नहीं जाने देते

सुप्रीम कोर्ट रविवार को भी खुला, ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में हिरासत का मामला; पुलिस कार्रवाई पर सुनवाई

फ्लाईदुबई के कॉकपिट में पायलट पर कुल्हाड़ी से हमला, NIA ने दर्ज की FIR; अपहरण की आशंका की जांच

News Desk October 11, 2026 October 11, 2026
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Previous Article महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय…. महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….
Next Article प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई…… प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई……
- Advertisement -
Ad imageAd image
- Advertisement -
Ad imageAd image

Stay Connected

235.3k Followers Like
69.1k Followers Follow
11.6k Followers Pin
56.4k Followers Follow
136k Subscribers Subscribe
4.4k Followers Follow

ताजा ख़बरें

प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई……
प्रदेश के 31 हजार गन्ना किसानों को मिलेगा 51.09 करोड़ रुपए का बोनस, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने गन्ना किसानों को दी बधाई……
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….
महिला सशक्तिकरण से विकसित छत्तीसगढ़ का सपना होगा साकार : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय….
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
हेमंत खण्डेलवाल ने बड़वानी, खरगोन और खंडवा में की बैठकें, मीसाबंदियों का किया सम्मान
हेमंत खण्डेलवाल ने बड़वानी, खरगोन और खंडवा में की बैठकें, मीसाबंदियों का किया सम्मान
राजनीती
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर के सीमावर्ती गांवों में सड़क संपर्क को मिल रही मजबूती….
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जशपुर के सीमावर्ती गांवों में सड़क संपर्क को मिल रही मजबूती….
छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ जनसंपर्क
//

यह एक हिंदी वेब न्यूज़ पोर्टल है जिसमें ब्रेकिंग न्यूज़ के अलावा राजनीति, प्रशासन, ट्रेंडिंग न्यूज, बॉलीवुड, खेल जगत, लाइफस्टाइल, बिजनेस, सेहत, ब्यूटी, रोजगार तथा टेक्नोलॉजी से संबंधित खबरें पोस्ट की जाती है।

संपादक - Rohit Sharma
मोबाइल - 7062483333
ईमेल -
कार्यालय - Naya Para,Dau Mil Gali Jagdalpur - 494001
October 2026
M T W T F S S
 1234
567891011
12131415161718
19202122232425
262728293031  
« Sep    
Follow US
© 2022 Foxiz News Network. Ruby Design Company. All Rights Reserved.
  • Home
  • About Us
  • Contact Us
  • MP Info RSS Feed
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?