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देश

सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश, ‘तीसरी भाषा’ अगले साल से लागू करने पर विचार

News Desk
Last updated: 2026/09/18 at 9:09 AM
News Desk
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5 Min Read
सुप्रीम कोर्ट का CBSE को निर्देश, ‘तीसरी भाषा’ अगले साल से लागू करने पर विचार
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नईदिल्ली 
सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की 3 भाषा नीति को अचानक लागू करने पर एक बार फिर सवाल उठाया है. कोर्ट ने कहा कि छठी क्लास के बच्चों के लिए तीसरी भाषा को अगले साल से लागू किया जाना चाहिए. इससे बच्चों को मानसिक रूप से तैयार होने का समय मिलेगा. CBSE ने विचार के लिए समय मांगा। सुप्रीम कोर्ट में  सुनवाई के दौरान कक्षा 9 के छात्रों को भी राहत देने की मांग उठी। इस पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, “हर कोई बिना कुछ पढ़े मुफ्त में डिग्री चाहता है। यही संस्कृति हम बढ़ावा दे रहे हैं… कक्षा 9 एक परिपक्व कक्षा है।”

याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, सीबीएसई का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।

यह मामला सीबीएसई की तीन भाषा नीति से जुड़ा है, जिसके तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई का प्रावधान किया गया है। मामले में कक्षा 6 के छात्रों के लिए भी राहत पर पहले अदालत ने सीबीएसई से अपने रुख पर दोबारा विचार करने को कहा था।

छटी क्लास के बच्चों को मिले छूट: SC
पीठ ने सालिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता से कहा, 'इस वर्ष कक्षा-छह पर विचार करें… यदि उन्हें कुछ समायोजन दिया जा सकता है।' एसजी मेहता ने अदालत से याचिकाओं की सुनवाई को टालने का अनुरोध किया क्योंकि अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी उपलब्ध नहीं थीं।

हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि संबंधित अधिकारी पीठ के सुझाव पर विचार करेंगे। एक याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में अधिक स्थगन के कारण देरी नहीं होनी चाहिए क्योंकि छात्रों को अंततः परीक्षा देनी है और इससे उनके माता-पिता में चिंता बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट एक समूह की याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था जो कक्षा-नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने वाली सीबीएसई की नीति को चुनौती दे रही थीं, जिसमें दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, जो एक जुलाई से लागू होनी थीं।

क्या है सीबीएसई की 3 भाषा नीति?
20 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई नीति से उत्पन्न समस्याओं के समाधान की आवश्यकता पर यह कहते हुए जोर दिया कि बच्चों को किसी भी प्रकार के दबाव में नहीं आना चाहिए।

पीठ ने यह भी नोट किया कि एक पहलू जो विचार करने की आवश्यकता है, वह यह है कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के संबंध में पर्याप्त मानव संसाधन बुनियादी ढांचा कैसे बनाया जाए।

उसने कहा, 'यदि आपने कक्षा-छह को प्रारंभिक बिंदु के रूप में चुना है, तो आप इस वर्ष इसके छात्रों को राहत देने पर विचार कर सकते हैं। आप इसे अगले वर्ष से लागू कर सकते हैं।'

सीबीएसई द्वारा जारी एक परिपत्र के अनुसार, कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल हैं, एक जुलाई से अनिवार्य कर दिया गया है।

क्या है मामला?

    सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है।
    इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं।
    याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और सीबीएसई के अधिकार को लेकर सवाल उठाए।
    मामले में कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी से जवाब मांगा और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है।
    आज इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है।

 

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