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देश

ब्रिक्स में चीन ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, क्या बदल रही है दोनों की दोस्ती?

News Desk
Last updated: 2026/09/14 at 9:10 AM
News Desk
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7 Min Read
ब्रिक्स में चीन ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका, क्या बदल रही है दोनों की दोस्ती?
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नई दिल्ली
चीन और पाकिस्तान हमेशा कहते रहे हैं कि उनकी दोस्ती हर मौसम में चलती है। चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा साथी है। पाकिस्तान ने चीन को सीपीईसी जैसी परियोजनाओं से अरब सागर तक रास्ता दिया है। लेकिन नई दिल्ली में ब्रिक्स बैठक में एक बात खास रही। चीन उस बैठक में था, जिसमें 2025 के पहलगाम हमले की निंदा हुई। बैठक में आतंकवाद पर सख्ती की बात भी कही गई। घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 के हमले की निंदा की गई। उस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसमें सीमा पार आतंकियों, आतंक को पैसे देने और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पाकिस्तान का नाम नहीं लिया गया। भारत के ऑपरेशन सिंदूर का समर्थन भी नहीं किया गया। फिर भी चीन का इस दस्तावेज पर दस्तखत करना बड़ी बात है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या दोनों देशों के रिश्ते बदल रहे हैं?

चीन की मौजूदगी क्यों जरूरी है?
दरअसल, पहलगाम का जिक्र नया नहीं था। मई में भी ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने इस हमले की निंदा की थी। दिल्ली के लिए यह इसलिए बड़ा है क्योंकि चीन पाकिस्तान का करीबी दोस्त माना जाता है। यह बात उस समय हुई जब भारत और चीन 2020 के गलवान झगड़े के बाद रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। शी जिनपिंग नई दिल्ली आए। चीन ने ऐसे बयान पर दस्तखत किए जो भारत की बड़ी सुरक्षा चिंता से जुड़ा है। इसका मतलब यह नहीं कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। लेकिन सवाल यह है कि जब चीन के अपने फायदे दांव पर हों, तो वह पाकिस्तान का कितना साथ देगा।

चीन की सबसे बड़ी समस्या क्या?
बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण भारत नहीं है। कारण है चीनी नागरिकों की सुरक्षा। सीपीईसी पर काम कर रहे चीनी मजदूरों पर, खासकर बलूचिस्तान में, बार-बार हमले हो रहे हैं। इस कारण चीन नाराज है। अब चीन खुलकर पाकिस्तान से सुरक्षा सुधारने को कह रहा है। कुछ परियोजनाएं हमलों के बाद कुछ समय के लिए रुकी भी थीं। 2026 में भी यही समस्या है। चीन सीपीईसी 2.0 आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन सुरक्षा पर जोर दे रहा है। पाकिस्तान ने चीनी लोगों और परियोजनाओं की सुरक्षा सुधारने का वादा किया है। यही कारण है कि रिश्ता टूटा नहीं है। लेकिन सीपीईसी पर सुरक्षा की दिक्कतें बढ़ रही हैं।

निवेश को लेकर सवाल
खबर है कि दोनों देशों के बीच निवेश को लेकर भी फर्क दिख रहा है। खबर है कि चीन की एक बड़ी कंपनी ने पाकिस्तान की बिजली कंपनी खरीदने का प्लान वापस ले लिया। वजह है पैसे की समस्या और सुरक्षा का खतरा। सीपीईसी बड़े चीनी निवेश पर बना था। अब चीन सिर्फ दोस्ती के लिए पैसा नहीं लगाना चाहता। वह देख रहा है कि पैसा वापस आएगा या नहीं और काम सुरक्षित है या नहीं। पाकिस्तान को चीन के पैसे की जरूरत है, लेकिन वह कर्ज और सुरक्षा की समस्या से जूझ रहा है।

बता दें कि मई 2026 में शहबाज शरीफ चीन गए। शी जिनपिंग से मुलाकात हुई। दोनों ने दोस्ती और सीपीईसी को और मजबूत करने की बात कही। चीन ने सीपीईसी 2.0 का साथ दोहराया। पाकिस्तान ने सुरक्षा सुधारने का वादा किया। अगस्त में भी दोनों पक्षों ने सीपीईसी पर बात की। यानी चीन दूर नहीं हो रहा। वह पाकिस्तान से और ज्यादा मांग कर रहा है। शायद यही कारण है कि कुछ मुद्दे पर तनाव दिख रहा है।

पाकिस्तान और ब्रिक्स
पाकिस्तान 2023 से ब्रिक्स में शामिल होना चाहता है। उसने चीन और रूस से मदद मांगी। लेकिन सभी देशों की सहमति चाहिए। भारत का विरोध बड़ी रुकावट है। ब्रिक्स में जाने से पाकिस्तान को ज्यादा पहचान और नई ताकतों से बात करने का मौका मिल सकता है। चीन अब तक भारत के विरोध को पार नहीं कर पाया है। लगता है चीन पाकिस्तान के साथ रिश्ता भी रखना चाहता है और भारत के साथ भी बेहतर संबंध रखना चाहता है।

पहलगाम वाले बयान के पीछे क्या कारण?
चीन के पाकिस्तान में बड़े हित हैं। सीपीईसी कश्मीर के उस हिस्से से जाता है जो पाकिस्तान के पास है। ग्वादर से अरब सागर तक रास्ता मिलता है। पाकिस्तान भारत के सामने संतुलन भी बनाता है। लेकिन चीन का भारत से बड़ा व्यापार भी है। वह सीमा पर शांति और भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है। मोदी और शी रिश्ते सुधारने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में चीन नहीं चाहता कि हर मामले में उसे सिर्फ पाकिस्तान का पक्षधर माना जाए। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम की बात इसी दिशा में जाती है। चीन पाकिस्तान का साथी रह सकता है, बिना हर बात पर उसका साथ दिए।

क्या रिश्ते खराब हो रहे हैं?
पाकिस्तान में लगातार चीनी लोगों पर हमले हो रहे हैं। सीपीईसी की सुरक्षा कमजोर है। निवेश का फायदा साफ नहीं है। परियोजनाओं में देरी है। चीन अब पैसे और सुरक्षा पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। साथ ही भारत से रिश्ते सुधारना चाहता है। लेकिन अभी बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। चीन अब भी पाकिस्तान को जरूरी साथी मानता है। पाकिस्तान अब भी चीन की मदद पर बहुत निर्भर है। चीन सीपीईसी 2.0 का साथ दे रहा है।

बता दें कि पहले पाकिस्तान चीन को रास्ता और साथ देता था। चीन पाकिस्तान को पैसा, समर्थन और सुरक्षा देता था। अब चीन बदले में ज्यादा चाहता है- अपने लोगों की सुरक्षा, अपने पैसे की सुरक्षा और काम में साफ तस्वीर। इसलिए ब्रिक्स में पहलगाम का जिक्र अहम है। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता है कि चीन ने पाकिस्तान को छोड़ दिया। बात यह है कि पाकिस्तान अब यह नहीं मान सकता कि भारत से टकराव होने पर चीन हर बार अपने आप भारत के खिलाफ खड़ा हो जाएगा। नई दिल्ली के लिए यही बात सबसे बड़ी है।

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