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देश

मदरसों में नई शिक्षा नीति की पहल, 26 संस्थानों को मिला प्रमाणपत्र

News Desk
Last updated: 2026/09/05 at 4:38 PM
News Desk
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5 Min Read
मदरसों में नई शिक्षा नीति की पहल, 26 संस्थानों को मिला प्रमाणपत्र
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मदरसों में नई शिक्षा नीति की पहल, 26 संस्थानों को मिला प्रमाणपत्र

देहरादून
 उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार की पहल आगे बढ़ रही है। नई नीति के तहत निर्धारित पाठ्यक्रम तैयार करने और उसे लागू कर पढ़ाने वाले 26 मदरसों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रमाणपत्र प्रदान किए। इसके साथ ही उत्तराखंड में नई नीति के तहत मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या बढ़कर 33 हो गई है।

मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। सरकारी कार्यक्रम होने के कारण यहां राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का पूरा गायन हुआ। कार्यक्रम में मौजूद मदरसा संचालक भी सम्मानपूर्वक खड़े होकर वंदे मातरम् के गायन में शामिल हुए।

मदरसों में साइंस और टेक्नोलॉजी जरूरी: धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आज के दौर में मदरसों में पारंपरिक शिक्षा के साथ साइंस और टेक्नोलॉजी की पढ़ाई भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को आधुनिक शिक्षा और तकनीकी ज्ञान से नहीं जोड़ा गया तो वे बदलते समय के साथ आगे बढ़ने में पीछे रह सकते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसी वर्ग के खिलाफ नहीं, बल्कि अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि सरकार के बारे में कुछ विपक्षी दल भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं और सरकार को मुस्लिम विरोधी बताते हैं, जबकि कानून का पालन करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का कोई सवाल ही नहीं है।

मदरसों का रजिस्ट्रेशन और नया पाठ्यक्रम

उत्तराखंड सरकार ने 1 जुलाई को मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर उसके स्थान पर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया। नई व्यवस्था के तहत राज्य के मदरसों का रजिस्ट्रेशन जरूरी किया गया है।

इसी प्राधिकरण की ओर से नया पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। नई व्यवस्था में मदरसों में NCERT आधारित पाठ्यक्रम लागू करने के साथ साइंस, मैथ्स, सोशल साइंस और इंग्लिश जैसे विषयों की पढ़ाई को अनिवार्य किया गया है। सरकार का जोर मदरसा शिक्षा को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ने पर है, ताकि यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आगे की शिक्षा और रोजगार के अवसरों के लिए बेहतर तैयारी मिल सके।

मदरसा संचालकों ने बताया सकारात्मक कदम

नई व्यवस्था के तहत प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले मदरसा संचालकों ने सरकार के कदम का समर्थन किया। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीति और नीयत साफ है। उनका तर्क है कि यदि बच्चों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलती है तो इससे उनके भविष्य को ही मजबूती मिलेगी।

मदरसा संचालकों ने कहा कि समान शिक्षा और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलने से विद्यार्थियों के लिए आगे बढ़ने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने नई व्यवस्था का विरोध करने वालों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा को बेहतर बनाने की पहल का विरोध व्यक्तिगत कारणों से नहीं होना चाहिए।

30 सितंबर तक रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में नए सिस्टम के तहत मदरसों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 30 सितंबर तक जारी रहेगी। पुराने मदरसा बोर्ड के समय राज्य में कुल 452 मदरसे पंजीकृत थे। हालांकि नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक केवल 33 मदरसों ने नए सिस्टम के तहत रजिस्ट्रेशन कराया है।

सरकार की नई व्यवस्था को लेकर सभी मदरसा संचालक एकमत नहीं हैं। कुछ संचालक अभी भी इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि मदरसों का मूल उद्देश्य मजहबी तालीम देना है और नए पाठ्यक्रम के जरिए धीरे-धीरे पारंपरिक मदरसा शिक्षा को कमजोर किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार और मदरसा संचालकों के बीच इस मुद्दे पर संवाद और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

निकाहनामे में भी बदलाव की तैयारी

इसी बीच उत्तराखंड में मुस्लिम सामाजिक व्यवस्था से जुड़े एक अन्य फैसले की भी चर्चा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने नया निकाहनामा तैयार किया है। नए निकाहनामे में दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह के लिए दिए जाने वाले कॉलम हटाने का निर्णय लिया गया है।

मदरसा शिक्षा में बदलाव और निकाहनामे में प्रस्तावित परिवर्तन, दोनों ही फैसले उत्तराखंड में मुस्लिम समाज से जुड़े संस्थागत और सामाजिक मामलों में सरकार की सक्रियता को दर्शाते हैं। अब निगाह इस बात पर होगी कि नई शिक्षा व्यवस्था के तहत कितने और मदरसे रजिस्ट्रेशन कराते हैं और आधुनिक पाठ्यक्रम को लेकर मदरसा संचालकों की आपत्तियों का समाधान किस तरह किया जाता है।

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